बेवफा शायरी

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Bewafa Shayari In Hindi
Bewafa Shayari In Hindi

 

Bewafa  Shayari In Hindi

 

जो नजर से गुजर जाया करते हैं;
वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं;
कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते,
बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।


धड़कन बिना दिल का मतलब ही क्या;
रौशनी के बिना दिये का मतलब ही क्या;
क्यों कहते हैं लोग कि मोहब्बत न कर दर्द मिलता है;
वो क्या जाने कि दर्द बिना मोहब्बत का मतलब ही क्या।


समझौतों की भीड़-भाड़ में सबसे रिश्ता टूट गया;
इतने घुटने टेके हमने आख़िर घुटना टूट गया;
ये मंज़र भी देखे हमने इस दुनिया के मेले में;
टूटा-फूटा बचा रहा है, अच्छा ख़ासा टूट गया।
बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की;
कोई किसी को टूट कर चाहता है;
और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।


दिल पे क्या गुज़री वो अनजान क्या जाने;
प्यार किसे कहते है वो नादान क्या जाने;
हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का;
कैसे बना था घौंसला वो तूफान क्या जाने।


हर सितम सह कर कितने ग़म छिपाये हमने;
तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने;
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।


कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते;
हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते;
अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा;
बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।


आज फिर तेरी याद आयी बारिश को देख कर;
दिल पे ज़ोर न रहा अपनी बेबसी को देख कर;
रोये इस कदर तेरी याद में;
कि बारिश भी थम गयी मेरी बारिश को देख कर।


बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;
तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को
जब तेरे शहर की हवा लगती है;
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;
मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।


हर सितम सह कर कितने गम छिपाए हमने;
तेरी ख़ातिर हर दिन आँसू बहाए हमने;
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला;
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।


रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है;
ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है;
हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू;
ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।


अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे;
तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे;
ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;
सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।


वक्त नूर को बेनूर कर देता है;
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है;
कौन चाहता है अपनों से दूर होना;
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।


इसी से जान गया मैं कि वक़्त ढलने लगे;
मैं थक के छाँव में बैठा और पाँव चलने लगे;
मैं दे रहा था सहारे तो एक हजूम में था;
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे।


आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये;
तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये;
कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें;
और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।


Akki

But First ,let Me Introduce Myself Properly,I'm Akki .I'm A Blogger Writer. I Love Blogging And Guide Others People About Blogging Also.

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