ख्यालों में वही, सपनो में वही, लेकिन उनकी यादों में हम थे ही नही

ख्यालों में वही, सपनो में वही, लेकिन उनकी यादों में हम थे ही नही, हम जागते रहे दुनिया सोती रही, एक बारिश ही थी, जो हमारे साथ रोती रही.

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❤बरसात की भीगी रातों में फिर कोई सुहानी याद आई, कुछ अपना

❤बरसात की भीगी रातों में फिर कोई सुहानी याद आई, कुछ अपना जमाना याद आया कुछ उनकी जवानी याद आई, हम भूल चुके थे जिसने हमें दुनिया में अकेला छोर दिया, जब गौर किया तो एक सूरत जानी पहचानी याद आई.

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